बिहार के नहीं, सम्पूर्ण भारत के लेनिन थे बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा

बिहार के नहीं सम्पूर्ण देश के लेलिन हैं बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा — सामाजिक न्याय और देशव्यापी भागीदारी के संघर्ष के प्रतीक

बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा का सामाजिक न्याय, समान भागीदारी और शोषित-वंचित वर्गों के अधिकारों का संघर्ष केवल बिहार तक सीमित नहीं था। जानिए क्यों उन्हें सम्पूर्ण देश के सामाजिक न्याय आंदोलन का महत्वपूर्ण नायक माना जाता है।

बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा और उनके क्रांतिकारी विचार

बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा का चित्र और उनके सामाजिक न्याय एवं भागीदारी के क्रांतिकारी विचार

बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा के क्रांतिकारी विचार, सामाजिक न्याय और समान भागीदारी की उनकी लड़ाई आज भी वंचित समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है ही भारतीय राजनीति का नक्शा भी बदल देने वाली है।

85% भागीदारी चाहिए देश के हर संसाधन में

85 प्रतिशत भागीदारी और देश के हर संसाधन में समान हिस्सेदारी की मांग दर्शाता आरक्षण जागरूकता थंबनेल

आरक्षण की बहस से आगे बढ़कर शिक्षा, रोजगार, अर्थव्यवस्था, संसाधनों और निर्णय प्रक्रिया में व्यापक सामाजिक भागीदारी का सवाल—“आरक्षण नहीं, भागीदारी चाहिए” की विचारधारा को समझने वाला लेख।

85 प्रतिशत आरक्षण हमारा मूलभूत अधिकार है: आबादी, प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय का सवाल

OBC, SC और ST की आबादी, सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व और 85% आरक्षण की सामाजिक न्याय आधारित मांग को आंकड़ों और संविधान के संदर्भ में समझिए।